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Astrology

मौनी अमावस्या के व्रत से पुत्री-दामाद की आयु बढ़ती है

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़ : इस वर्ष 4 फरवरी को प्रयागराज में अर्द्धकुंभ, माघ अमावस अर्थात मोैनी अमावस, सोमवती...

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क्या परिवर्तन लाएंगे शुक्र पहली सितंबर से आपके जीवन में

मदन गुप्ता सपाटू ज्योतिर्विद् ज्योतिष में ग्रहों के गोचर का बहुत अधिक महत्व होता है। कई बार कुंडली में ग्रह बहुत अच्छे लगते हैं परंतु अचानक ऐसा कुछ घट जाता है कि हम ज्योतिष शास्त्र पर उंगलियां उठाने लगते हैं जबकि ज्योतिषी गलत हो सकता है ज्योतिष नहीं । उसकी गणना या कुंडली को समुचित दृष्टिकोण से न देख पाने में कमी और उसका सही विश्लेषण् करने में कमी हो सकतीहै। जैसे किसी की कुंडली में शुक्र जितना अभी अच्छा हो परंतु 1 अगस्त को जब वह नीच राशिमें आ गया तो अच्छे भले पारिवारिक जीवन में विष घोल गया होगा। अब वही शुक्र 1सितंबर, शनिवार की रात्रि 11 बजकर 46 मिनट से अपनी तुला राशि में आ रहे हैं जिससेविभिन्न राशियों पर अलग अलग प्रभाव पड़ेगा। जीवन कभी एक सा नहीं रह सकता। उस में हर पल परिवर्तन आता है। ज्योतिषीय गणना जीवन के इसी पल पल परिवर्तन की व्याख्याकरता है जिसे फलित ज्योतिष कहते हैं। शुक्र नैसर्गिक रूप से एक लाभदाता ग्रह माना गया है। इसे कला, प्रेम, सौंदर्य और सांसारिक सुखों का कारक कहा जाता है.जिन लोगों की कुंडली में शुक्र की स्थिति अच्छी होती है उन्हें जीवन में भौतिक वस्तुओं और सुखों की प्राप्ति होती है। चाहे वो लग्जरी वाहन, विदेश यात्रा,इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वैवाहिक या प्रेम संबंध हो। वहीं शुक्र के अशुभ प्रभाव से कड़ी मेहनत के बावजूद परिणाम की प्राप्ति में देरीहोती है। त्वचा व यौन रोग से परेशानी होती है। ऐसी स्थिति में ज्योतिषीय परामर्श लेकर शुक्र ग्रह की शांति अवश्य करना चाहिए। शुक्र भोर का तारा नाम से...

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