बड़ी साजिश का खुलासा : माओवादी पीएम मोदी की ‘राजीव गांधी की तरह हत्या’ करने की साजिश रच रहे थे

    भीमा-कोरेगांव में जनवरी में हुई हिंसा में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. कोरेगांव मामले में पुणे पुलिस को माओवादियों की एक ऐसी चिट्ठी हाथ लगी है, जिसमें इस बात का जिक्र है कि माओवादी ‘एक और राजीव गांधी हत्याकांड’ की योजना बना रहे हैं. केंद्रीय गृहमंत्री ने इसे माओवादियों की हताशा बताया है.

    देश में एक ओर सुरक्षाबल नक्सलवादियों का लगातार सफाया कर रहे हैं, तो दूसरी ओर नक्सली तमाम देश विरोधी साजिशें रच रहे हैं. पुणे पुलिस को माओवादियों की एक ऐसी चिट्ठी हासिल हुई है, जिससे पता चलता है कि माओवादी पीएम मोदी की ‘राजीव गांधी की तरह हत्या’ करने की साजिश रच रहे थे.

    गौरतलब है कि पुणे पुलिस ने शुक्रवार को कोरेगांव मामले से संबंध रखने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि इनके प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से संबंध हैं. पुलिस को आरोपियों में से एक के घर से चिट्ठी मिली है, जिसमें इस बात का जिक्र है कि माओवादी ‘एक और राजीव गांधी हत्याकांड’ की योजना बना रहे हैं. इसी चिट्ठी को पुणे की पुलिस ने कोर्ट में पेश किया है.

    बरामद चिट्ठी में लिखा है:

    ‘मोदी 15 से अधिक राज्यों में बीजेपी को स्थापित करने में सफल हुए हैं. अगर यही गति जारी रही तो सभी मोर्चों पर पार्टी के लिए दिक्कत खड़ी हो जाएगी. कॉमरेड किसन और कुछ अन्य सीनियर कॉमरेड्स ने मोदी राज को खत्म करने के लिए कुछ मजबूत कदम सुझाए हैं. हम सभी राजीव गांधी जैसे हत्याकांड पर विचार कर रहे हैं. यह आत्मघाती जैसा मालूम होता है और इसकी भी अधिक संभावनाएं हैं कि हम असफल हो जाएं, लेकिन हमें लगता है कि पार्टी हमारे प्रस्ताव पर विचार करे. उन्हें रोड शो में टारगेट करना एक असरदार रणनीति हो सकती है. हमें लगता है कि पार्टी का अस्तित्व किसी भी त्याग से ऊपर है. बाकी अगले पत्र में.’

    इस खुलासे के बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एजेंसियां प्रधानमंत्री की सुरक्षा का हमेशा ख्याल रखती हैं. उन्होंने कहा कि माओवादी और उग्रवादी अब अपनी हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं.

    तमाम राजनीतिक दलों ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए सुरक्षा एजेंसियों को इस पर ध्यान देने की जरूरत बताई है.

    राजनीतिक दलों का मानना है कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. सरकार का भी मानना है कि ये सुरक्षाबलों के नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की हताशा है.

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