मेरा सपना था, बहनें गरीबी से लड़ें और जीतकर आगे आयें, वह मुझे पूरा होता दिखाई दे रहा है : शिवराज सिंह चौहान

    गरीबी से जंग में जीत की प्रतीक हैं पोल्ट्री प्रोड्यूसर्स कंपनी की बहनें -शिवराज सिंह चौहान

    भोपाल :  आज मेरे लिए बहुत ही खुशी का दिन है। मैंने प्रदेश में अपनी माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक सपना देखा था। मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही मैं लगातार प्रयास कर रहा हूँ कि हमारी बहनें गरीबी से लड़ें और जीतकर आगे आयें। मेरा यह सपना आज मुझे पूरा होता दिखाई दे रहा है। मध्यप्रदेश की इटारसी तहसील के कीरतपुर गाँव में महिलाओं की अपनी कंपनी ”मध्यप्रदेश वूमेन पोल्ट्री प्रोड्यूसर्स” ने मुर्गी दाने का कारखाना यानि पैलेट फीड प्लांट लगाया है। आज इसका शुभारंभ करते हुए मेरा मन बहुत भावुक हो गया। इस कंपनी की महिलाओं ने अद्भुत कार्य कर दिखाया है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं है। हमें बस यह प्रण करना है कि हम गरीबी से लड़ेंगे और जीतकर दिखा देंगे। इन्होंने जीतकर दिखा दिया।

    आज प्रारंभ हुए इस मुर्गीदाना प्लांट की क्षमता 400 टन मुर्गीदाना प्रतिदिन उत्पादन की है। यह प्लांट प्रतिवर्ष 36 हजार टन मक्का और 18 हजार टन सोयाबीन खली खरीदेगा। पहले इस क्षेत्र में मुर्गीपालन करने वाले महिला समूहों को मुर्गीदाना बाहर से मंगवाना पड़ता था। इस प्लांट के लगने से मुर्गीदाने की लागत मूल्य में कमी आयेगी, जिसका इस कार्य में लगी सभी बहनों को लाभ मिलेगा।

    मध्यप्रदेश वूमेन पोल्ट्री प्रोड्यूसर्स कंपनी के इस कारखाने में 10 करोड़ रुपये कंपनी ने लगाये हैं तथा 12 करोड़ रुपये का नीदरलैंड की रेवो बैंक ने लोन दिया है। कंपनी में 11 महिला स्व-सहायता समूहों के 6 हजार परिवार जुड़े हुए हैं। सभी परिवार प्रदेश के होशंगाबाद, बैतूल, सीधी, डिण्डोरी, छतरपुर, टीकमगढ़, सागर, विदिशा, सिंगरौली और अनूपपुर जिलों के हैं। कंपनी का पिछले वर्ष का वार्षिक टर्नओवर 240 करोड़ रुपये का रहा। क्या कभी इस बात की कल्पना की जा सकती थी कि हमारी ग्रामीण माताएँ और बहनें अपनी मेहनत और समझ-बूझ के बल पर इतना बड़ा कारोबार स्थापित कर सकती है? यह निश्चित रूप से किसी सपने के पूरा होने जैसा है।

    इस कंपनी की माताओं और बहनों ने आज से 17 साल पहले महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मुर्गीपालन का कार्य प्रारंभ किया था। मध्यप्रदेश शासन के आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित इन महिला स्व-सहायता समूहों की 5,174 महिलाएँ ही इस कंपनी की शेयर धारक हैं। आजीविका मिशन ने अधोसंरचना के विकास में इन समूहों की सहायता की। इन समूहों में कार्यशील पूँजी स्वयं समूहों की बहनों ने लगाई । इस कंपनी को औद्योगिक केन्द्र विकास निगम ने साढ़े तीन एकड़ जमीन, 2 करोड़ रुपये में उपलब्ध कराई है। सत्रह साल का समय बहुत लम्बा होता है। इन बहनों ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करती रही। अपनी मेहनत से इतनी लम्बी यात्रा तय करते हुए इन्होंने आज यह उपलब्धि हासिल की है।

    मैं इस कंपनी से जुड़ी सभी बहनों और परिवारों को बधाई देता हूँ। इन बहनों ने प्रदेश की सभी बहनों के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। सभी बहनों को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। मुझे इस बात की भी खुशी है कि आज प्रदेश में माताएँ और बहनें आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। आज प्रदेश में करीब दो लाख से ज्यादा महिला स्व-सहायता समूह कार्य कर रहे हैं। इनकी बचत आज ढ़ाई सौ करोड़ रुपये हो गई है। इनसे लगभग 25 लाख परिवार जुड़े हुए हैं। यह सभी अच्छा कार्य कर रही हैं।

    मध्यप्रदेश में ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत निर्धन ग्रामीण परिवारों को आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से सशक्त करने के लिए स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है। निर्धन परिवार की महिला समूह सदस्यों को दिये जा रहे लगातार प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण से उनको जागरूक किया गया है। इनकी दक्षता बढ़ने एवं मिशन द्वारा किये गये सहयोग से आजीविका के अनेक अवसर उपलब्ध कराये गये हैं। इन अवसरों के कारण ही आज प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों की 1 लाख 43 हजार से अधिक सदस्य बहनों की सालाना आमदनी 1 लाख रुपये से ज्यादा हो रही है। इनके परिवारों में समृद्धि और खुशहाली आई है। आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूह साबुन निर्माण, गुड़, मूंगफली चिक्की निर्माण, अगरबत्ती उत्पादन, सब्जी उत्पादन, हथकरघा, परिधान निर्माण, सेनेटरी नेपकिन निर्माण एवं विभिन्न कृषि आधारित कार्यों में संलग्न हैं। प्रदेश में इन स्व-सहायता समूहों को मध्यान्ह भोजन एवं आँगनवाड़ी में गर्म पोषण आहार उपलब्ध कराने, पूरक पोषण आहार बनाने व बाँटने की जिम्मेदारी दी गई है। इनको स्कूली बच्चों के युनीफार्म बनाने, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली मीटर रीडिंग और बिल वितरण की जिम्मेदारी भी दी गई है।

    मध्यप्रदेश सरकार इन समूहों को सभी सुविधाएँ और सहायता उपलब्ध कराने के लिए कृत संकल्पित है। हम इन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने देंगे। सरकार इनकी आमदनी बढ़ाने और इन्हें मार्केट उपलब्ध कराने की भी पूरी कोशिश कर रही है। इनको 3 प्रतिशत ब्याज दर पर हम लोन भी उपलब्ध करायेंगे। इन्हें स्टाम्प शुल्क नहीं लगेगा। फेडरेशन को मिलने वाले 5 करोड़ तक के लोन की बैंक गारंटी सरकार स्वयं लेगी। महिला स्व-सहायता समूह के फेडरेशन को टेक-होम-राशन निर्माण की फैक्टरी चलाने की जिम्मेदारी भी दे रहे हैं। मैं इन सभी समूहों की बहनों की बैठक भी शीघ्र ही बुलाऊँगा तथा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी चर्चा कर पूछूंगा कि इन्होंने अपने कार्यों को कैसे आगे बढ़ाया है। महिला स्व-सहायता समूहों को हम प्राथमिकता के आधार पर सहयोग कर रहे हैं। यह समूह प्रदेश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह मेरे लिए अत्यंत खुशी की बात है। मैं पुनः इन समूहों की बहनों को बधाई देता हूँ।

    इस प्रसंग में महान कवि हरिवंशराय बच्चन की कविता की एक पंक्ति मुझे सहज ही याद आ रही है कि …….. कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

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