Published On: Thu, Jan 31st, 2013

बेहतर अभियोजन हेतु रिट में अन्य राज्यों का अध्ययन के निर्देश

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सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में उत्तर प्रदेश में सीआरपीसी की धारा 25ए के खुले-आम उल्लंघन सम्बंधित रिट याचिका  में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है. साथ ही जस्टिस उमा नाथ सिंह और जस्टिस वी के दीक्षित की बेंच ने राज्य सरकार से इस सम्बन्ध में अन्य राज्यों में अपनाई जा रही व्यवस्था का अध्ययन कर इस बारे में जानकारी प्राप्त कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं.

सीआरपीसी की धारा 25ए में निर्धारित किया गया है कि प्रदेश में अभियोजन निदेशक दस साल से अधिक अनुभव के अधिवक्ता हों जिनकी नियुक्ति हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुमति से की जाए. हाई कोर्ट और सत्र न्यायालय के अभियोजन अधिकारी भी अभियोजन निदेशक के अंदर काम करें.

उत्तर प्रदेश में इसकी स्पष्ट अवहेलना की जा रही है, अतः ठाकुर ने प्रदेश में अभियोजन की स्थिति सुदृढ़ करने हेतु इस रिट याचिका में इसका पूर्ण अनुपालन कराये जाने का निवेदन किया था.

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