कैप्टन अमरिंदर सिंह 24 जुलाई को उबेर बाइक टैकसियों को हरी झंडी देंगे

0
86
cap amrinder
cap amrinder
cap amrinder
cap amrinder

चंडीगड़, 17 जुलाई: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह राज्य के बेरोजग़ार नौजवानों के लिए रोजग़ार के अवसर पैदा करने के मकसद से नयी स्कीम अधीन पहले चरण के अंतर्गत्त 100 उबेर बाइक टैकसियों को हरी झंडी दिखायेंगे।

      उबेर कंपनी की दक्षिणी एशिया की सार्वजनिक नीति की डायरैक्टर श्वेता राजवर्ष कोहली ने आज यहां मुख्यमंत्री के साथ मीटिंग करके इस स्कीम को शुरू करने संबंधी अंतिम रूप दिया। इसके साथ अगले एक वर्ष में पंजाब में रोजग़ार के 10,000 और मौके पैदा होंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ मीटिंग के बाद कोहली ने बताया कि अगले पांच वर्षो में इस स्कीम अधीन 45,000 नौकरियों के अवसर पैदा किये जाएंगे।
      कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मई महीने में कांग्रेस पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में किये वायदे मुताबिक सरकार के ‘अपनी गाड़ी अपना रोजग़ार’ के अंतर्गत सूबो में बाइक टैक्सी शुरू की स्वीकृति दी थी।
      उबेर कंपनी के प्रतिनिधि के साथ आज की मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी की तरफ से पंजाब में 7-सीटों वाली वैन चलाने पर भी विचार किया जा रहा है। 
      कोहली ने बताया कि उबेर कंपनी पिछले तीन वर्षो से पंजाब में है और 10,000 नौकरियां पहले ही सृजन कर चुकी है। उन्होंने कहा कि बाइक सांझा करने वाले नये उत्पाद-उबेर मोटर का मकसद लोगों को वाजिब दरों  पर आने-जाने के मौके मुहैया करवाना है और निचले स्तर पर उद्यमियों को अवसर प्रदान करना है।
      कोहली ने 24 जुलाई को मोहाली में उबेर बाइक को लांच करने के लिए सहमति देने पर मुख्य मंत्री का धन्यवाद किया।
      रोजग़ार सृजन करना जो कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार की मुख्य वचनबद्धता है, के इलावा यह प्रयास नौजवानों को उद्यमी बनने के लिए उत्साहित करेगा और निरंतर तौर पर चार पहिया वाहन न पहुंच सक नें वाले इलाकों में मुसाफिऱों को अपनी मंजि़ल के साथ जोडऩे के लिए भी सहायक होगा।
      इस नीति के अंतर्गत जिस को ट्रांसपोर्ट विभाग की तरफ से मौजूदा समय अंतिम रूप दिया जा रहा हैं, मौजूदा और नये मोटर साईकल मालिकों को दो-पहिया वाहन टैक्सी के तौर पर चलाने के लिए व्यापारिक परमिट और लाईसेंस दिए जाएंगे। प्रवक्ता ने बताया कि इस स्कीम के अंतर्गत निवेश की कम ज़रूरत होगी जिसके साथ बेरोजग़ार नौजवानों को अपना काम शुरू करने के लिए बड़े मौके हासिल होंगे।
      इस स्कीम की एक और विशेषता यह होगी कि सडक़ें से ट्रैफिक़ का दबाव घटने के इलावा प्रदूषण भी काबू में आयेगा। यह स्कीम राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल और हरियाणा में पहले ही सफलतापूर्वक चल रही है।
      कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र मुताबिक ‘अपनी गाड़ी अपना रोजग़ार ’ स्कीम के अंतर्गत बेरोजग़ार नौजवानों को सरकार की गारंटी के साथ प्रत्येक वर्ष सब्सिडी की दर पर एक लाख टैक्सी, व्यापारिक वाहन और अन्य वाहन दिए जाएंगे। सरकार की तरफ से ओला और उबेर जैसे बड़े टैक्सी ओपरेटरें तक पहुँच करके इस स्कीम की सफलता को यकीनी बनाया जायेगा जिसके अंतर्गत नौजवान अगले पाँच वर्ष कजऱ्े की अदायगी कर सकेंगे।
      नौजवानों के लिए रोजग़ार के मौके पैदा करन सहित उद्यमी बनने के लिए उत्साहित करन के लिए सरकार की तरफ से बनाईं स्कीमों में से यह सिफऱ् एक स्कीम है। सरकार की तरफ से कुछ ओर स्कीमों पर भी काम किया जा रहा है जिन में यारी  ऐंटरप्राईजिज़़ और हरा ट्रैक्टर शामिल है।
      हरा ट्रैक्टर स्कीम के अंतर्गत बेरोजग़ार नौजवानों को सब्सिडी जैसी दरों पर कम से -कम 25,000 ट्रैक्टर और अन्य खेती यंत्र दिए जाएंगे ताकि वह अपने स्तर पर खेती सेवाएं शुरू कर सकें। अपनी गाड़ी स्कीम की तरह इसमें भी सरकार की तरफ से गारंटी दी जायेगी और ज़मानत की कोई ज़रूरत नहीं होगी। पांच वर्षों में कजऱ्े की अदायगी करनी होगी।
      यारी ऐंटरप्राईजिज़़ का मकसद छोटे उद्यमियों को अधिक से अधिक पांच लाख रुपए के निवेश पर 30 प्रतिशत सब्सिडी के द्वारा दो या अधिक औद्योगिक कारोबार शुरू करने के प्रति उत्साहित करना है। इस स्कीम के अंतर्गत वर्ष 2017 से 2022 तक प्रत्येक वर्ष ऐसे एक लाख उद्योग की स्थापना करनी है।
SHARE
Previous articleWill not seek vote of confidence: Nagaland Chief Minister Shurhozelie Liezietsu
Next articleSri Rama Charitham presented by NFA in Indiana
We are a citizen journalism news Web site based in INDIA,that aims to put a human face on the news by showcasing vivid, first-person stories from individuals involved in current events. "We are driven by the belief that writing in the first person is more compelling than traditional journalism because it almost always requires the inclusion of personality. Third-person “he-said-she-said” reporting can mask the truth while making the reporter’s prejudice appear objective. "We invite ordinary people to tell their stories and photographs for free, letting readers vote on their favorites. The highest-rated stories star on the web site main pages, netting citizen journalists names high ratings and exposure on web search engines.

Leave a Reply