महामारी का रूप लेता स्वाइन फ्लू, जानिए इसका इलाज।

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Swine Flu spreading in India
के के शर्मा : भारत में स्वाइन फ्लू का प्रकोप दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। हाल ये है कि आम आदमी तो दूर विधायक,सांसद,कलाकार आदि बड़े लोग भी इससे नहीं बच पा रहे हैं। अब राजस्थान में एक विधायक की स्वाइन फ्लू से मृत्यु हो गई।
 
भीलवाड़ा के मांडलगढ़ से बीजेपी की विधायक कीर्ति कुमारी की गत सोमवार को स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। मांडलगढ़ के बिजौलिया पूर्व राजघराने की पूर्व राजकुमारी कीर्ति सिंह तीसरी बार बीजेपी की विधायक बनी थीं। बाईसा के नाम से पूरे इलाके मे लोकप्रिय थी कीर्ति कुमारी।बीजेपी विधायक की मौत के बाद सरकार पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी मौतें स्वाइन फ्लू से हो रही हैं, तो सरकार इसकी रोकथाम के लिए कोई कारगर उपाय क्यों नहीं कर रही है। 
 
 आठ साल पहले 2009 में महामारी की तरह फैलने वाले स्वाइन फ्लू ने इस साल एक बार फिर दस्तक दे दी है. अब तक देश में करीब 12,500 स्वाइन फ्लू के मामले दर्ज किए गए हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 600 लोगों की स्वइन फ्लू के कारण मौत हो चुकी है.  सबसे ज्यादा खराब स्थिति महाराष्ट्र की है. यहां 284, गुजरात में 75, केरल में 63 और राजस्थान में 59 जिंदगियां इस रोग ने लील लीं.  लोग अस्पताल पहुंचने में देरी कर रहे हैं. यही वजह है कि ज्यादा मौतें हो रही हैं.
स्वाइन फ्लू और इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) क्या है?–
स्वाइन इन्फ्लूएंजा एक संक्रामक सांस की रोग है जो कि सामान्य रूप से केवल सूअरों को प्रभावित करती है। यह आमतौर पर स्वाइन इन्फ्लूएंजा ए वायरस के H1N1 स्ट्रेंस के कारण होता है। हालांकि H1N2, H3N1 और H3N2 के रूप में अन्य स्ट्रेंस भी सूअरों में मौजूद रहते हैं। हालांकि लोगों में स्वाइन फ्लू होना सामान्य नहीं है, मानवीय संक्रमण कभी-कभी होते हैं, मुख्यतया संक्रमित सूअरों के साथ निकट संपर्क के बाद से।
मानव शरीर में H1N1 वायरस के प्रति प्रतिरोधक सहमत बहुत कम होती है, इसलिए यह जानलेवा बन चूका है, यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, H1N1 वायरस वायु के ज़रिये फैलता है,अगर यह कसी कठोर जगह गिरा तो 24 घंटे ज़िंदा रहता है और अगर किसी तरल जगह गिरे तो 20 मिनट तक ज़िंदा रहते है.
यह नया इन्फ्लूएंजा वायरस मौसमी फ्लू के सामान ही फैलता हैं; छोटी बूंदों के रूपमें, एक संक्रमित व्यक्ति की नाक और मुंह से, जब वो बात करते हैं खांसते या छींकते हैं। लोग संक्रमित हो सकते हैं अगर वो इन बूंदों को साँस में लेते हैं और वो किसी व्यक्ति या ऐसी चीज़ को छूते हैं जो कि वायरस से दूषित है (उदाहरण के लिए एक प्रयोग किया ऊतक या दरवाज़े के हैंडल) और फिर अपनी आँख और नाक को छूते हैं।अगर वे इन बूंदों को साँस लोगों को संक्रमित हो सकता है या फिर उनकी नाक या आंखों को छूने अगर वे किसी को या कुछ है कि वायरस से दूषित है (उदाहरण के लिए एक प्रयोग किया ऊतक या दरवाज़े के हैंडल) को छूने से।ऐसी सतहें जहाँ लोग अक्सर अपने हाथों से स्पर्श करते हैं उन्हें साफ और कीटाणुरहित करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है:
• हैंडल्स और स्विच 
• नल और टॉयलेट फ्लश के हैंडल 
• किचन वर्कटॉप्स 
• टेलीफोन रिसीवर्स 
• कंप्यूटर कीबोर्ड्स
स्वाइन फ्लू के कारण-
बदलते मौसम और तापमान में आई गिरावट के कारण स्वाइन फ्लू के वायरस सक्रिय हो जाते हैं। यह किसी को भी हो सकता है।स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में ट्रांसफर होता है
खांसने, छींकने, थूकने से वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
लंबे समय से बुखार, आंखों का लाल होना। गला खराब हो जाना, मांसपेशियों में दर्द होना स्वाइन फ्लू के लक्षण की ओर  इशारा करता है। तेज सिरदर्द होना, खांसी आना, कमजोरी महसूस करना ये भी स्वाइन फ्लू का लक्षण है। स्वाइन फ्लू में तेज ठंड लगती है। 
स्वाइन फ्लू से बचाव
बचाव के लिए जरूरी है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं, जिन लोगों को निम्न में से कोई बीमारी है, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है.
जैसे किसी को फेफड़ों, किडनी या दिल की बीमारी हो, मस्तिष्क संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी मसलन, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, डायबीटीज़, ऐसे लोग जिन्हें पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो, ऐसे लोगों को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
बच्चों में बुखार या बढ़ा हुआ तापमान होने पर डॉक्टर से संपर्क करें, यदि बच्चा अत्यधिक थकान महसूस करे तो उसे डॉक्टर को दिखायें.
व्यस्कों को बहुत जल्दी जल्दी सांस लेना या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। छाती या पेट में दर्द या भारीपन होना भी स्वाइन फ्लू का लक्षण हो सकता है.
साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरती जाए, तो इस बीमारी के फैलने के चांस न के बराबर हो जाते हैं.
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए ख्याल रखें कि जब भी खांसी या छींक आए रूमाल या टिश्यू पेपर यूज करें, इस्तेमाल किए मास्क या टिश्यू पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंकें, थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ को साबुन और पानी से धोते रहें.
लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से बचें, फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
अगर फ्लू के लक्षण नजर आते हैं तो दूसरों से एक मीटर की दूरी पर रहें, फ्लू के लक्षण दिखने पर घर पर रहें। ऑफिस, बाजार, स्कूल न जाएं, बिना धुले हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से परहेज करें
स्वाइन फ्लू का इलाज
स्वाइन फ्लू को रोकना का बड़ा उपाय है, हालांकि इसका इलाज भी अब मौजूद है, आराम करना, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना इसका सबसे बेहतर है, शुरुआत में पैरासीटमॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं, बीमारी के बढ़ने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है.
लेकिन इन दवाओं को कभी भी खुद से नहीं लेना चाहिए, वैसे सर्दी-जुखाम जैसे लक्षणों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली तुलसी, गिलोए, कपूर, लहसुन, एलोवीरा, आंवला जैसी आयुर्वेदिक दवाईयों का भी स्वाइन फ्लू के इलाज में बेहतर असर देखा गया है, सर्दियों में इन्हें लेने से वैसे भी जुखाम तीन फिट की दूरी पर रहता है, और स्वाइन फ्लू के वायरस से बचने के लिए भी इतने ही फासले की जरूरत होती है.
के के शर्मा

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