दस वर्षों में चीन भीख का कटोरा लेकर खड़ा होगा विश्व के सामने : श्री इंद्रेश कुमार

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सोनीपत, 14 नवंबर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्री इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत भूखण्डों का संकलन नहीं है,जैसे की अन्य देश हैं। इसी प्रकार हिंदूस्तान की संस्कृति में एकात्म है। जिसका मूल परमार्थ और सर्वकल्याण है। भारतीय संस्कृति बीज की तरह अभिन्न है। जिस तरह बीज के अंदर ही एक पूरा वृक्ष , उसके पत्ते, फूल व टहनियां  निहित हैं, उसी प्रकार भारत का समाज एकात्म है। उन्होंने कहा कि आने वाले दस वर्षों में चीन विश्व के सामने भीख का कटोरा लेकर खड़ा होगा।
श्री कुमार दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल में दीनबंधु छोटू राम चेयर द्वारा भारतीय शिक्षा एवं संस्कृति : एकात्म मानववाद विषय पर बतौर मुख्यातिथि के तौर पर संबाधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी भाग पर विपदा आने पर  पूरा देश उस तरफ चिंतित होकर सहायता के लिए अग्रसर होता है, जिस प्रकार मनुष्य के किसी भी अंग पर चोट लगने पर शरीर के दूसरे अंग उपचार हेतु वहां सहायता करने के लिए पहुंचते हैं। इसी प्रकार भारतीय संस्कृति सर्व समाज की संस्कृति है, जिसमें समाज के हर वर्ग का उत्थान व पोषण निहित है। भारतीय संस्कृति मांग की नहीं, बल्कि प्यार और परमार्थ की संस्कृति है। हमारे यहां पर होली खेली जाती है, जो कि प्यार का प्रतीक है।
श्री इंद्रेश कुमार ने कहा कि जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु भी निश्चित है। विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है , जिसका कभी जन्म नहीं हुआ। जबकि विश्व के अन्य देशों का जन्म का दिन है। वस्तुत: भारत नाम का मूल देश देवताओं से आया है। भारत ने हमेशा जीवों और जीने का संदेश देने के साथ साथ परमार्थ  का संदेश  दिया है। हमारी संस्कृति का जीवन मूल्य परमार्थ का था। इसलिए हमारा देश विश्व गुरु था। हिंदूस्तान का हर अभिभावक अपने बच्चों के लिए  कार्य करता है। इसलिए परमार्थ है। जबकि विदेशी अभिभावक अपने लिए करते हैं। पश्चिमी देशों का प्यार भोग की संस्कृति है, जबकि हमारा प्यार जीवन की संबद्धता है।भारतीय के प्यार में विकार उत्पन्न नहीं होता। भारत ने विश्व को जीवन मूल्य प्रदान किए हैं। भारतीय संस्कृति सनातन की संस्कृति हैं, जिसमें सब धर्मों व उपधर्मों को साथ लेकर चला जाता है।
एक छात्रा के प्रश्न के उत्तर देते हुए श्री इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारतीय अपने देश से प्रेम की भावना से स्वदेशी अपनाएं और चीन के माल का बहिष्कार करें। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की मूल जड़ो का आकंलन विख्यात अर्थशास्त्री भी करने में असफल रहे हैं। उन्होंने प्रति प्रश्न किया कि चीन खाद्यान्न में आत्मनिर्भर नहीं है, जो किसी भी मानवता के भरण पोषण के लिए मूल आवश्यक्ता है। चीन खाद्यान्न में भारत पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि चीन आने वाले दस वर्षों में विश्व के सामने भीख का कटोरा लेकर खड़ा होगा। जिसे हम वर्तमान में चीन का विकास कह रहें हैं, वह चीन का विकास नहीं, बल्कि चीन का विनाश है। चीन हमारे देश के रॉमैटीरियल के बिना जीवित नहीं रह सकता। अगर हम चीन का माल लेना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन दूसरे धर्मों का विरोधी है। चीन अमानवीय है, इसलिए वहां पर हिंसा होती है। श्री इंद्रेश कुमार ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे चीन के माल को त्याग दें तथा स्वदेशी वस्तुओं  से प्यार करें। विद्यार्थियों को इसे अपने जीवन का उद्देश्य व लक्ष्य बना लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में पढे लिखे के साथ साथ समझदार होना भी आवश्यक है। पैकेज में राष्ट्रभक्ति होनी चाहिए तथा शिक्षा में नैतिकता होनी चाहिए, तभी हम अच्छे नागरिक बनेंगे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्रकुमार अनायत ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी राष्ट्र के समुचित विकास के लिए  , उसे अपनी संस्कृति के आदर्शों के अनुकूल आगे बढने हेतु उचित शिक्षा की महत्ती आवश्यक्ता होती है,क्योंकि शिक्षा के द्वारा ही समाज में वांछित परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एकात्म मानववाद व्यक्ति एवं समाज की आवश्यक्ता को संतुलित करते हुए प्रत्येक मानव का गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करता है। एकात्म मानववाद के अनुसार व्यक्ति राष्ट्र, समाज, परिवार और चराचर सृष्टि से निकलने  वाली विकास क्रम का ही अविष्कार है।  एकात्म मानववाद भारतीय संस्कृति के विचार एवं दर्शन का निचौड़ है। व्याख्यान के समापन के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री इंद्रेश कुमार को कुलपति प्रो. अनायत ने स्मृतिचिन्ह  व रजिस्ट्रार प्रो.एस.के.गर्ग व दीनबंधु छोटू राम चेयर के प्रो.बी.पी.मलिक ने  चदर भेंट कर सम्मानित किया। मंच संचालन डा.अमिता मलिक ने किया। इस अवसर पर राज्य सूचनायुक्त श्री भूपेंद्र धर्माणी, श्री कुलदीप , श्री शशीभूषण, श्री विरेंद्र सिंह दहिया, डा.अजय सिंह यादव व विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर , अधिकारीगण व कर्मचारी उपस्थित थे।
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