पढ़िये जीवन और मृत्यु से सम्बन्धित गूढ़ कथन को आचार्य चाणक्य ने कितने सरलता से समझाया

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Chanakya Quotes

Chanakya Quotesदशमोऽध्याय

आचार्य चाणक्य कहते हैं
        
एकवृक्षसमारूढा नाना वर्णा विहङ्गमाः।
प्रभाते दिक्षु दशसु का तत्र परिवेदना॥१५॥
*शब्दार्थ*   :—  *नानावर्णाः*= विविध रंग और रूपों के *विहङ्गमाः*= पक्षी *एकवृक्ष-समारूढाः*= एक वृक्ष पर बैठते हैं और *प्रभाते*= प्रभातवेला में, प्रातःकाल *दशसु दिक्षु*= दसदिशाओं में उड़ जाते हैं *तत्र*= इस विषय में *का*= क्या *परिवेदना*= शोक।
*भावार्थ*   :— जीवन और मृत्यु से सम्बन्धित गूढ़ कथन को आचार्य चाणक्य ने अत्यन्त सरलता से स्पष्ट किया है। वे कहते हैं कि कबूतर, कौआ, चिड़िया, तोता — ये सभी विभिन्न जाति और वर्ण पक्षी होते हुए भी रात्रि-समय एक ही वृक्ष पर विश्राम करते हैं। लेकिन प्रातः होते ही अपने-अपने मार्ग की ओर उड़ जाते हैं। जीवात्माएँ भी इसी प्रकार परिवार रूपी वृक्ष का कुछ समय तक बसेरा करती हैं। तदनंतर नीयत समय आने पर वृक्ष को छोड़कर उड़ जाती हैं। इसलिए उनके जाने पर दुःखी और शोकातुर नहीं होना चाहिए। सृष्टि का यही नियम है और इसी नियम से संपूर्ण ब्रह्मांड संचालित होता है। इसे बदलना सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी के लिए भी असंभव है।

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