रक्तदान करना जीवन में सबसे बड़ा पुण्य का कार्य होता है : कुलपति प्रो. टंकेश्वर

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अक्टूबर 04, 2017 : गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि रक्तदान करने से न केवल जीवन बचता है बल्कि रक्तदान करने वाले रक्तदाता के जीवन में भी सुधार होता है। किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए रक्तदान सबसे बड़ा पुण्य का कार्य होता है। 
 
प्रो. टंकेश्वर कुमार विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा रेडक्रास, हरियाणा के सहायोग से आयोजित किए गए रक्तदान शिविर के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्यातिथि सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. अनिल कुमार पुंडीर व डा. सुनीता श्रीवास्तव धर्मपत्नी प्रो. टंकेश्वर कुमार भी उपस्थित रहे। प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना देश के विकास व सामाजिक समस्याओं को हल करने में बड़ा योगदान दे रही है। ऐसे कार्यक्रमों से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों व कर्मचारियों में समाज व राष्ट्र के प्रति और अधिक सेवाभाव जागृत होगा तथा विश्वविद्यालय को समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभाने की और बड़ी प्रेरणा मिलेगी।
 
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. अनिल कुमार पुंडीर ने रक्तदान करते हुए कहा कि मानव की जिम्मेदारी बनती है कि वो प्रकृति से जो लेता है उसको वापिस भी करे। ऐसे शिविरों के माध्यम से युवा शक्ति के मन में दान देने की भावना पैदा होती है। इसके साथ-साथ युवा और अधिक अनुशासित व समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने में सक्षम होता है। एनएसएस समन्वयक प्रो. सुजाता सांघी ने बताया कि रक्तदान शिविर में भाग ले रहे युवाओं में भारी उत्साह देखने को मिला। यह उत्साह राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों द्वारा की गई कई दिनों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अत्यंत व्यवस्थित व उत्साहपूर्वक माहौल में लगे इस शिविर से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों में समाजहित के प्रति भावना और अधिक प्रबल होगी। उन्होंने बताया कि शिविर में रक्तदाताओं द्वारा 207 यूनिट रक्तदान किया गया जिसमें 35 लड़कियां ने भी रक्तदान किया। एनएसएस इकाई हरियाणा, पंचकूला से आए डा. कपेन्द्र ने भी रक्तदान किया। इस अवसर पर डा. अनिल कुमार, डा. कश्मीरी लाल, डा. सुमन दहिया, डा. सुनीता, डा. रमेश धारीवाल सहित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, अधिकारी, कर्मचारी व विद्यार्थी भारी संख्या में उपस्थित थे।

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