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Category: Chanakya Quotes

जानिए आचार्य चाणक्य भाग्य के विषय मे क्या कहते हैं ?

आचार्य चाणक्य कहते हैं दशमोऽध्यायः रङ्कं करोति राजानं राजानं रङ्कमेव छ। धनिनं निर्धनं चैव निर्धनं धनिनं विधिः॥५॥ *शब्दार्थ*   :— यह सत्य है कि *विधिः*= विधाता, परमेश्वर *रङ्कम्*=
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मनुष्य को स्वयं का स्तुतिगान नहीं करना चाहिए : आचार्य चाणक्य

chanakyaआचार्य चाणक्य कहते हैं                🔸नवमोऽध्यायः🔸 स्वहस्तग्रथिता        माला       स्वहस्तघृष्टचन्दनम्। स्वहस्तलिखितमं स्तोत्रं शक्रस्यापि श्रियं हरेत्॥१२॥ *🔸शब्दार्थ*  :—
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आचार्य चाणक्य द्वारा मूर्ख और बुद्धिमान व्यक्ति की दिनचर्या का उल्लेख

आचार्य चाणक्य कहते हैं नवमोऽध्यायः प्रातर्द्यूतप्रसंगेन         मध्याह्ने        स्त्रीप्रसंगतः। रात्रौ चौर्यप्रसंगेन कालो गच्छत्यधीमताम्॥११॥ *🔸शब्दार्थ*   :— *अधिमताम्*= मूर्ख लोगों का *कालः*= समय
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गुणहीन व्यक्ति की सुन्दरता व्यर्थ है : आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य कहते हैं 🔸सप्तमोऽध्यायः🔸 निर्गुणस्य हतं रूपं दुःशीलस्य हतं कुलम्। असिद्धस्य हता विद्या अभोगेन हतं धनम्॥१६॥ *🔸शब्दार्थ* :— *निर्गुणस्य*= गुणहीन मनुष्य का *रूपम्*= रूप, सुन्दरता *हतम्*= मारी
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दुर्जन को वश में करने के लिए तलवार का सहारा लेना पड़ता है : आचार्य चाणक्य

सप्तमोऽध्यायः हस्ती अङ्कुशहस्तेन वाजी हस्तेन ताडयते। श्रृङ्गी लगुडहस्तेन खड्गहस्तेन दुर्जनः॥८॥ शब्दार्थ*   :— *हस्ती*= हाथी *अङ्गकुशहस्तेन*= हाथ में पकड़े हुए अंकुश से *वाजी*= घोड़ा *हस्तेन*= हाथ में लिए
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पुराणों के हिसाब से ज्ञान जिससे भी मिले उसे प्रेमपूर्वक स्वीकार करें : आचार्य चाणक्य

षष्ठोऽध्याय सिंहदेकं     वकादेकं     शिक्षेच्चत्वारि    कुक्कुटात्। वायसात्पञ्च शिक्षेच्च षट् शुनस्त्रीणि गर्दभात्॥१४॥ *शब्दार्थ*   :— मनुष्य को *सिंहात्*= सिंह, शेर से *एकम्*= एक गुण *वक्रात्*= बगुले से *एकम्*= एक गुण *कुक्कुटात्*=
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