जानिए टोने-टोटको और ताबीजो की कार्य प्रणाली का रहस्य

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krishna
गोपुत्र कृष्णानंद
गोपुत्र कृष्णानन्द :यह ब्रह्माण्ड कुछ शाश्वत नियमों से संचालित होता है जिसे प्रकृति के नियम कहते है |इन्ही नियमों के अन्वेषण के आधार पर आधुनिक भौतिक विज्ञानं के चमत्कारिक समझे जाने वाले आविष्कारो का संसार खड़ा है |
जिन कार्य या घटनाओ या प्रभाव के कारणों और नियमों का हमें ज्ञान होता है वे सामान्य और तर्कसंगत लगती है ,पर जिन नियमों का ज्ञान हमें नहीं होता उनके कारण होने वाली घटनाओ को हम चमत्कार मान लेते है
 ,,,,तंत्र-मन्त्र ,टोने-टोटके ,ताबीज ,यंत्र ,और अनुष्ठान आदि की शक्ति भी प्रकृति की शक्ति से और नियमों से काम करती है |वास्तव में तंत्र-मन्त्र ,योग ,पूजा ,अनुष्ठान ,यज्ञ ,यंत्र ,टोने-टोटके ,ताबीज आदि में एक बृहद उर्जा विज्ञानं काम करता है ,जो ब्रह्मांडीय उर्जा संरचना ,क्रिया ,तरंगों ,उनसे निर्मित भौतिक इकाइयों की उर्जा संरचना का विज्ञानं है ,,,इस उर्जा संरचना को ही तंत्र कहा जाता है |
 
इसकी तकनीक प्रकृति की स्वाभाविक तकनीक है ,,,यही तकनीक तंत्र ,योग ,सिद्धि ,साधना में प्रयुक्त की जाती है ,,,प्रायोगिक स्वरुप भिन्न होता है
टोने-टोटके-ताबीज में प्राणी के शारीर और प्रकृति की उर्जा संरचना ही कार्य करती है ,,इनका मुख्या आधार मानसिक शक्ति का केंद्रीकरण और भावना होता है
 
 ,,,,प्रकृति में उपस्थित वनस्पतियों और जन्तुओ में एक उर्जा परिपथ कार्य करता है ,मृत्यु के बाद भी इनमे तरंगे कार्य करती है
 
 ,,,,इनमे विभिन्न तरंगे स्वीकार की जाती है और निष्कासित की जाती है |जब किसी वास्तु या पदार्थ पर मानसिक शक्ति और भावना को केंद्रीकृत करके विशिष्ट क्रिया की जाती है तो उस पदार्थ से तरंगों का उत्सर्जन होने लगता है
 ,,,,जिस भावना से उनका प्रयोग जिसके लिए किया जाता है ,वह इच्छित स्थान पर वैसा कार्य करने लगता है ,|
उदहारण के लिए यदि किसी के बाल जलाये जाये तो उससे उत्पान्न तरंग का ग्रहणकर्ता वही व्यक्ति होगा ,सामान्यतया यह महसूस नहीं होता ,किन्तु वही बाल यदि तीब्र मानसिक शक्ति वाला व्यक्ति बुरी भावना के साथ विशिष्ट क्रियाए करके जला दे तो बालो से उत्पन्न तरंगे प्राप्तकर्ता की उर्जा परिपथ की प्रकृति ही बदल देगे ,,वह रुग्ण ,मानसिक रूप से क्षुब्ध ,अवसाद ग्रस्त हो जायेगा |
इसी प्रकार कोई पदार्थ अच्छी भावना से मानसिक शक्ति केंद्रित करके विशिष्ट क्रिया करके दी जाये तो प्राप्तकर्ता की उर्जा परिपथ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उसे लाभ होता है |सभी जगह उर्जा ही कार्य करती है |मानसिक शक्तियों द्वारा उन्हें परिवर्तित अवश्य किया जा सकता है
इसी प्रकार ताबीज बनाने वाला जब अपने ईष्ट में सचमुच डूबता है तो वह अपने ईष्ट के अनुसार भाव को प्राप्त होता है 
,,भाव गहन है तो मानसिक शक्ति एकाग्र होती है ,जिससे वह शक्तिशाली होती है ,यह शक्तिशाली हुई तो उसके उर्जा परिपथ का आंतरिक तंत्र शक्तिशाली होता है और शक्तिशाली तरंगे उत्सर्जित करता है |
ऐसा व्यक्ति यदि किसी विशेष समय,ऋतू-मॉस में विशेष तरीके से ,विशेष पदार्थो को लेकर अपनी मानसिक शक्ति और मन्त्र से उसे सिद्ध करता है तो वह ताबीज धारक व्यक्ति को अच्छे-बुरे भाव की तरंगों से लिप्त कर देता है |
 
यह समस्त क्रिया शारीर के उर्जा चक्र को प्रभावित करती है और तदनुसार व्यक्ति को उनका प्रभाव दिखाई देता है

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