स्वामी जी ने कहा शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण होना चाहिए

अमित कुमार
                            अमित कुमार

अमित कुमार : भारत एक चिर पुरातन राष्ट है यहां समय समय पर देवी देवताओं ने स्वयं मानव रूप में जन्म लेकर मानव समाज को सत्य और अहिंसा के पाठ पढ़ाये हैभारत में ऋषि मुनियों एवं विद्वानों की एक श्रृंखला रही है स्वामी विवेकानंद जी का नाम भी इसी श्रृंखला में आता है इनका जन्म12 जनवरी1863को कलकत्ता में एक प्रसिद्ध परिवार में हुआ था इनके पिता जी श्री विश्व नाथ दत्त एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता थे इनकी माता का नाम भुनेश्वरी देवी था और ये 9 भाई बहन थे इनकी माता बहुत धार्मिक थी स्वामी विवेकानंद जी के बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था प्यार से इनको नरेन नाम से बुलाते थे ये बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे और अध्यात्म के सवाल महात्माओं से संतों से पूछते रहते थेजैसे कि ईश्वर कहा रहते है और कैसे मिलेंगे इत्यादि इनकी  इस जिज्ञासा के चलते इनकी मुलाकात रामकृष्ण परमहंस जी से हुई जिन्होंने इनकी जिज्ञासा का समाधान किया और विवेकानंद जी ने उन्हें गुरू के रूप में स्वीकार किया|

मात्र39 वर्ष के लघु जीवन काल में स्वामी जी ने 4 ग्रंथों की रचना की- ये है ज्ञानयोग, भक्ति योग, कर्मयोग, राजयोग||
स्वामी विवेकानंद जीने उपनिषद से निकले श्लोक ‘उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य पूरा न हो जाय’ को विश्व के हर युवा की जुबान तक पहुचाने का काम किया 
स्वामी विवेकानंद जी ने 1893 में विश्व धर्म संसद में कहा था ‘मुझे अपने धर्म पर गर्व है जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वविकर्ता की शिक्षा दी| हम न केवल सार्वभौमिक सहिष्णुता में विश्वास करते हैं बल्कि सभी धर्मों को मूल रूप में स्वीकार करते हैं मुझे अपने देश पर भी गर्व है जिसने सभी धर्मों को शरण दी|
स्वामी विवेकानंद जी ने व्यक्ति और चरित्र निर्माण के बारे में कहा कि मेरे जीवन का लक्ष्य व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण है मैं न तो कोई नेता हूँ और न ही समाज सुधारक, मुझे केवल आत्मा की फिक्र है जब आत्मा शुद्ध और साफ हो जाएगी तो सारी समस्याएं स्वतः मिट जाएंगी||
स्वामी जी ने कहा शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण होना चाहिए,  स्वामी जी के इस उद्देश्य की प्रतिपूर्ति के लिए परम पूज्य डॉ हेडगेवार जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की और पिछले92 सालों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी60000 शाखाओं के माध्यम से युवाओं में चरित्र निर्माण और व्यक्ति निर्माण का कार्य कर रहा है सभी युवा शक्ति को संघ की शाखाओं में जाना चाहिए 
 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here