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टाइपिस्ट की नौकरी से कम्पनियो के मालिक तक का सफर

दोस्तों आपने फिल्मो में अवश्य देखा होगा की एक सामान्य व्यक्ति अपनी मेहनत व् लगन से बहुत बड़ा आदमी बन जाता है , परन्तु क्या आपने असल में किसी भी सामान्य से निचे जीवन यापन करने वाले व्यक्ति को एक टाइपिस्ट की नौकरी से कई कम्पनियो के मालिक के रूप में देखा है । Ajay Sharma

जी हाँ आज हम आपको चंडीगढ़ के अजय शर्मा जी से मिलाते हैं जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत व् लगन से वो कर दिखाया जो हम सभी के लिए प्रेरणा के समान है , उन्होंने यह साबित कर दिया की अगर इरादे पक्के हों तो मंजिल मुश्किल नहीं होती। उन्हें उनकी मेहनत से इतना बड़ा कारोबार फैलाने के लिए हिमाचल सरकार ने हाल ही में हिम गौरव का अवॉर्ड भी दिया । वह मूलतः हिमाचल से हैं परन्तु चंडीगढ़ में माता पिता जीवन यापन के लिए आये और उनकी पढाई भी चंड़ीगड में सामान्य स्कूल में ही हुई वह एक अति सामान्य परिवार से हैं। 

हर माता पिता का एक सपना होता हे की उनके बच्चे मेहनत करके आगे बढ़ें , अजय शर्मा ने भी कड़ी मेहनत करते अपनी पहली नौकरी 1997 में  एक टाइपिस्ट की नौकरी के रूप में शुरू करी उन्हें हर माह उस समय मात्र 750 रुपए वेतन के रूप में मिलते थे। लेकिन उन्होंने दृढ़ निश्चय किया की वह इतनी मेहनत करेंगे की जिंदगी में कुछ ऐसा करेंगे की सभी उससे प्रेरणा लेंगे उन्होंने 2000 तक यह नौकरी करी।

अजय शर्मा ने अपनी पुराणी यादें बटोरते हुए बताया की उन्होंने बीच-बीच में पाॅर्ट टाइम नौकरी भी करी। वह रोजाना करीब 14 से 18 घंटे काम करते थे । संन 2000 शर्मा की जंदगी में एक नया मोड़ लेकर आया उनकी कड़ी मेहनत को देखते एक बड़ी कंपनी ने जॉब ऑफर की। लेकिन शर्मा ने जॉब का ऑफर ठुकरा दिया। उन्होंने उस कम्पनी से जॉब की जगह असाइनमेंट बेसिस पर काम पकड़ना पसंद किया । 

एमएनसी कंपनी ने उन्हें पहला काम ट्राइडेंट ग्रुप की डिजाइनिंग का काम दिया। उन्होंने इस काम को पूरा करने के लिए अपने दोस्त  यश अरोड़ा को चुना वह उनके बचपन के दोस्त हैं । दोनों ने मिलकर मेहनत कर वह काम तय समय से भी पहले कर दिया। बस फिर उन्हें अच्छे प्रोजेक्ट मिलते गए और काम आगे बढ़ता गया।

2002 में अजय ने सेक्टर-34 में एक छोटे से कैबिन से अपने नए काम की सुरुवात कर दी और देखते ही देखते टीम भी बनती गई और उनकी नई कंपनी एनिमेशन और मल्टीमीडिया का बढ़िया काम करने लगी। काम इतना अच्छा था की उनकी नई कंपनी ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपना नाम बना लिया , उन्हें इस कंपनी को बेचने का ऑफर आ गया और उन्होंने अमेरिका की एक कंपनी को इस कंपनी को करीब 30 लाख रुपए में बेच दिया  और फिर उन्होंने इसी कंपनी में बतौर जीएम नौकरी शुरू कर दी।

वह नौकरी नहीं कर सकते थे क्योंकि वह खुद का एक बड़ा सपना ले चुके थे तभी भारतीय सॉफ्टवेयर एवं डिज़ाइन बाजार का विदेशो में बोल बाला चल रहा था दो साल नौकरी करने के बाद उन्होंने अपना करियर शून्य से फिर सुरु किया। इसके बाद आज तक अजय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मात्र सात साल में उन्होंने चार कंपनियां खड़ी कर दीं। उन्होंने मॉर्फ अकादमी, ज्यूरी अकादमी, बिग बॉक्स, आईटी टेक्नोलॉजी के नाम से कंपनियां शुरू कर दी हैं। आज वह उतर भारत में एनिमेशन, वेब डिजाइनिंग, फैशन डिजाइनिंग, फिल्म मेकिंग, ब्यूटीशियन की शिक्षा देनेवालों में  सबसे आगे है। आज उनके पास लगभग १०० कर्मचारी हैं। अबतक अजय शर्मा ने 10 हजार स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देकर नौकरी व् स्वरोजगार दिलवा चुके हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने मित्रो और अपने परिवार वालो को देते हैं । 

उनका बचपन का दोस्त यश अरोड़ा आज भी उनके साथ काम करता है, और वह एक इंटरनेशनल कंपनी के प्रोजेक्ट्स को देख रहा हैं। अजय का मानना है लगन से हर व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है और वह सदा ही अपने विद्यार्थियों को मेहनत और सच पर चलने का मन्त्र देते हैं। 

अजय शर्मा के करीबी मित्र बताते हैं की इनकी सफलता का एक राज यह भी है की अजय अपने हर कर्मचारी के साथ पारिवारिक सदस्य की तरह बर्ताव कतरे हैं। जिससे अजय के कर्मचारी कार्य को अपने पारिवारिक कार्य की तरह ही करते हैं और अजय अब तक अपने कई कर्मचारियों की अलग से पहचान बने में भी मदद कर चुके हैं । 

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