जब बड़ी बहन ने ही छोटी बहन की खुसियाँ छीनी

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गोपुत्र कृष्णानंद : आजादी के 70 साल बाद भी दहेज पर लगाम लगाया जाना सरकार को भारी पड़ रहा ,प्रमोद कुमारी अपने माँ  पिता की तीन बहनों में सबसे छोटी संतान थी कम उम्र में विवाह कर माँ पिता ने अपनी जिम्मेदारी निभा ली मगर विवाह बाद मा पिता जी दोनो ही बीमारी में स्वर्गवासी हो गए।
 
माता पिता की मृत्यु के बाद प्रमोद के जीजा बहनों ने प्रमोद का गवना कर तो दिया मगर विवाह के समय जो वर पक्ष को दहेज देने की बात हुई थी उसकी पूर्ति न कि गई जिस कारण ससुराल वालों ने प्रमोद को ठुकरा दिया और प्रमोद अपने बहन जीजा के घर आ गई, ससुराल वालों के ठुकराए जाने के बाद प्रमोद 8 सालो तक पति के आकर ले जाने की बाट देखती रही मगर कोई न आया अंत मे प्रमोद ने मुंबई के एक अपने नजदीकी रिश्तेदार के कहने पर मुंबई के ही कृष्णा शुक्ला से विवाह कर लिया।
 
प्रमोद ने कृष्णा जी को अपने दूसरे नो.की बहन जीजा जो फतेहपुर में रहते है से मिलाया और उनसे इजाजत लेकर कृष्णा के साथ कृष्णा के घर मिर्ज़ापुर आ गई जहा कृष्णा के घर वालो नेविंध्याचल मन्दिर में दोनों की शादी सम्पन्न करा दी और दोनों मुंबई चले गये विवाह के बाद प्रमोद नए पति के साथ सुखमय जीवन बिताने लगी मगर इस विवाह से प्रमोद की बड़ी बहन खुश नही थी क्योंकि उसके घर का देखभाल प्रमोद के हाथों था विवाह बाद कई अवसरों पर उसने अपनी नाराजगी जताई और कृष्णा को छोड़ने की बात कही।
 
मगर प्रमोद के मना करने पर उसकी बहन ने एक चाल चली और प्रमोद के पूर्व पति को सारी बाते बताकर प्रमोद पर बिना तलाक दूसरी शादी का मुकदमा करवा दिया यहां प्रमोद और उसके घर वालो ने एक गलती की की पहली विवाह की बात तो कृष्णा जी को बताई मगर गवना में पति से मिलने की बात छुपा ली गई विवाह के लगभग दो साल बाद प्रमोद के पहले पति ने प्रमोद की बहन के उकसाने पर प्रमोद के दूसरे विवाह को लेकर मुकदमा कर दिया और प्रमोद की हँसती खेलती जिंदगी में भूचाल आ गया ,प्रमोद न घर की रही न घाट की, प्रमोद को उसकी दूसरी बहन ने फोन पर सारी बाते बता कर प्रमोद को मुंबई से फतेहपुर बुला लिया और प्रमोद को सारी जानकारी दी।
 
प्रमोद की बड़ी बहन ने फिर यहां चाल चली और कृष्णा को फसाने के लिए प्रमोद पर दबाव डाला कि कृष्णा पर जबरन भगा कर ले जाने और विवाह का मुकदमा करने को कहा । मगर प्रमोद ने ऐसा करने से मना कर दिया, अपनो के कारण ही एक सबला नारी अबला बन गई एक हँसता खेलता परिवार बिखर गया।
 
वह कृष्णा और कोई नहीं मैं गोपुत्र कृष्णानंद हूँ ।

1 COMMENT

  1. गुरुजी ,
    ये कहानी अधूरी है और इसका अंत सुखद होना चाहिये । गलती दोनो तरफ़ से हुयी है लेकिन अब दुनिया को पता चलना चाहिये कि … गलत और गलतफ़हमी दोनों का अंत निश्चित है ।

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