कुलभूषण जाधव की फांसी पे लगी रोक पर युवा कवि मयंक शर्मा की एक रचना

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मयंक शर्मा
मयंक शर्मा

(इंटरनेशनल कोर्ट में कुलभूषण जाधव की फांसी पे लगी रोक के लिए वकील हरीश साल्वे जी और सरकार को शुभकामना देती और आगे की लड़ाई को जीतने की उम्मीद जताती मेरी नयी रचना)
कवि – मयंक शर्मा ,दुर्ग ( छत्तीसगढ़ )

मयंक शर्मा
मयंक शर्माU

फिर से आज तिरंगे वाला रंग जीत के आया है
एक रुपए के सिक्के से वो जंग जीत के आया है

न्यायालय में जाके दर्पण दिखलाया हैवानों को
खूब जोर का चाटा मारा है पाकी अरमानों को

अभी अधूरी जीत हुई है अभी अधूरी बाकी है
कुलभूषण को अभी देश में वापस लाना बाकी है

रोक लगी है फांसी पे तुम वापस लाने तक लड़ना
जहाँ जहाँ पर पाक अड़ेगा वहां वहां पर तुम अड़ना

नमन वकालत को तेरी और नमन तुम्हारी कोशिश को
इंटरनेशनल कोर्ट में रौंदा मक्कारों की साज़िश को

कुलभूषण है देश का भूषण उसे बचाकर ले आओ
क्या होते है हिंदुस्तानी लोग बताकर ले आओ

अभी खेल बाकी है फिर से पाक अड़ंगा डालेगा
न्यायालय के परिणामों को बनते कोशिश टालेगा

पाकिस्तान करेगा कोशिश कुलभूषण ना बच पाए
चाहे जो भी हो जाए भारतवासी ना हँस पाए

पर तुम भी कोशिश करना की बेटा खोने ना पाए
पाक जेल के हैवानों के मन की होने ना पाए

जिस दिन बेटा भारत की सरहद पे वापस आएगा
दीप जलेंगे घर घर में भारत त्यौहार मनाएगा.

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