बाबा रामदेव को व्यापारी कहने वालों को दीपक कुमार का करारा थप्पड़

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कुछ लोग कहते हैं बाबा रामदेव व्यापारी है ,योगी को व्यापार नहीं करना चाहिए । उन लोगों को मेरा उत्तर कुछ इस प्रकार है । आप होटल में खाने जाते हो कोई रसोइया खाना बनाता है उस रसोइया को उसकी कीमत मिलता है । क्या घर मे खाना बनाने वाली माँ, बहन,बेटी , बहू या फिर आपका परिवार का कोई भी सदस्य जो खाना बनाये वो आपके लिए रसोइयां है ? आप के घर में झाड़ू लगाने ,बर्तन साफ करने या फिर कपड़ा धोने अगर कोई बाई आती है ,लेकिन क्या ये काम आपकी माँ ,बहन ,बेटी और पत्नी करें तो क्या उनको आप काम वाली बाई कहोगे ?

बस इन दोनों बातों से समझिये संत वो होता है जो अपना सर्वस्व अर्पित करके धर्म ,संस्कृति का पालन करते हों । धर्म की नाम पर कोई पाखंड का प्रचार ना करता हो और अपनी पूजा ना करवाता हो । योगऋषि स्वामी रामदेव जी ने ऋषियों द्वारा प्रदत्त योग ,आयुर्वेद की ज्ञान को घर घर तक पहोंचाया ।

राष्ट्र रक्षा केलिए देशहित मे आयुर्वेदिक उत्पाद बना कर लोगों को दिया । पतंजलि आयुर्वेद के किसी भी पद पर वो नहीं है ना ही एक भी रुपये लेते है । स्वामी जी के नाम पे न तो एक इंच जमीन है और ना कोई बैंक बैलेंस । आज भी वो दो वक्त कीथोड़ा सात्विक खाना खाते हैं और जमीन पर सोते हैं ।

पतंजलि आयुर्वेद का लाभांश भी समाज की सेवा में खर्च होता है । पूज्य स्वामी रामदेव जी वेद,महर्षि दयानंद सरस्वती तथा आर्य समाज के संस्कारों का देन है इसलिये उनको कितना बिरोध कोई करे उनको झूठ से हरा नहीं सकता ।
देश मे पूरी प्रमाणिकता के साथ स्वदेशी की क्रांति लाने वाले योगंनिष्ठ ,राष्ट्रीय संत स्वामी रामदेव जी को शत शत नमन ।
जय हिंद ।जय पतंजलि ।

 

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