प्रश्न शास्त्र में राशियों का क्या योग है

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Abhay Pandey
ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय : आइए अब जाने की प्रश्न शास्त्र में राशियों का क्या योग है लग्न में यदि द्विस्वभाव राशि है मगर 15 डिग्री से कम है तो इसे स्थिर राशि माना जाएगा
लग्न में स्थिर राशि होने पर यदि प्रो उन्नति के प्रश्न का उत्तर प्रमोशन होगा विवाह के प्रश्न में उत्तर विवाह होगा और चोरी के प्रश्न के उत्तर सामान वापस मिलेगा यात्रा के प्रश्न का उत्तर यात्रा नहीं होगी बीमारी के प्रश्न का उत्तर बीमारी दूर नहीं होगी मगर मृत्यु भी नहीं होगी मुकदमें या चुनाव के प्रश्न का उत्तर जातक नहीं हारेगा आदि होते हैं
 
इत्थशाल और ईशरफ योग का प्रश्न शास्त्र में योगदान होता है
इत्थशाल योग  यदि मंदगति ग्रह के तीव्र गति ग्रह से अधिकांश हो और मंद गति ग्रह वक्री हो तो इतधंसाल योग का निर्माण होता है इसराफ योग यदि तीव्र गति ग्रह मंदगति ग्रह से आगे हो तो इशरंफ योग का निर्माण होता है
 
प्रश्न शास्त्र एक अद्भुत शास्त्र हैं जिसने ज्योतिषी को एक बार में सिर्फ एक प्रश्न का उत्तर देना चाहिए
जातक की भावना निष्कपट नहीं है तो कैसे पता लगाएं
१) चंद्रमा लग्न में हो और सूर्य बुध शनि केंद्र में हो
२) चंद्रमा लग्न में शनि केंद्र में हो और बुध अस्त हो
जातक निष्कपट है अगर
1) बृहस्पति और बुध सप्तम में स्थित हो
२) लग्नेश और सप्तमेश पर चंद्रमा और बृहस्पति की शुभ दृष्टि हो,
3) चंद्रमा और बृहस्पति केंद्र या त्रिकोण में हो
 
प्रश्न कुंडली में सर्वप्रथम देखना चाहिए कि लग्न में कौन सी राशि आ रही है शुभ राशि शीर्षोदय और अशुभ राशि पृष्ठों दिया वह उभ्योदय राशि को देखना चाहिए आइए जानें 
शीर्षोदय राशियां  3 5 6 7 8 और11
पृष्ठौदय राशियां  1 2 4 9  10 राशियां
उभयोदय राशि 12
 
 इसमें इतध साल योग शुभ माना जाता है
 
 जिस भाव में गुरु बुध व शुक्र है या बली चंद्रमा है या इन ग्रहों की उस भाव पर दृष्टि हो तथा अशुभ ग्रह उसमें स्थित नहीं होते या दृष्टि नहीं डालते तो उस भाव का कारक तत्व उत्तम हो जाता है
, यदि भावेश केंद्र या त्रिकोण में स्थित है तो भी वह उत्तम माना जाता है (
(उस का कारक तत्व)
यदि भाव में उच्च मूल त्रिकोण या मित्र ग्रह स्थित हो तो भी उसका कारक तत्व उत्तम माना जाता हैं
इन्हें भावों का बल कहा जाता है
 
 ऊपर  लगन और भावों के बल बताए गए हैं 
लग्न में कौन सी राशियां हो तो कार्य में सफलता मिलती है यह बताया गया है हम आता है कि प्रश्नकर्ता प्रशन पूछता है तो लगन वह खुद होता है
लग्नेश अगर कारक के साथ इसराफ योग का निर्माण करता है तो प्रश्न भूतकाल से संबंधित होता है
और यदि इत्थशाल के साथ संबंध होने पर प्रश्न वर्तमान से संबंधित होता है
 
 प्रश्न कुंडली में सर्वाधिक बली ग्रह द्वारा प्रश्न का ज्ञान होता है अगर प्रश्न कुंडली में दो या अधिक ग्रह बलि हैं तो जिस बली ग्रह के अंश सर्वाधिक हो उसे सर्वाधिक बली ग्रह समझना चाहिए
 
यही प्रश्न के प्रकार की जानकारी देगा
 
आइए अब जाने की प्रश्न शास्त्र में राशियों का क्या योग है लग्न में यदि द्विस्वभाव राशि है मगर 15 डिग्री से कम है तो इसे स्थिर राशि माना जाएगा
लग्न में स्थिर राशि होने पर यदि प्रो उन्नति के प्रश्न का उत्तर प्रमोशन होगा विवाह के प्रश्न में उत्तर विवाह होगा और चोरी के प्रश्न के उत्तर सामान वापस मिलेगा यात्रा के प्रश्न का उत्तर यात्रा नहीं होगी बीमारी के प्रश्न का उत्तर बीमारी दूर नहीं होगी मगर मृत्यु भी नहीं होगी मुकदमें या चुनाव के प्रश्न का उत्तर जातक नहीं हारेगा आदि होते हैं
 
सर्वाधिक बली ग्रह जानने के बाद उन भावों को ज्ञात करते हैं जिनका स्वामी वह ग्रह है जहांं जहां यह स्थित है यदि बली ग्रह केंद्र में है या मित्र राशि में है या अपने ही घर में है या उच्च का है उसी से प्रश्न का ज्ञान होता है

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