केवल एक महीना ही बचा है विवाहों के लिए

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मदन गुप्ता सपाटू , ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़ : इस महीने 11 तारीख से विवाह के मुहूर्त फिर से आरंभ हो रहे हैं जो केवल 12 दिसंबर तक ही रहेंगे अर्थात केवल एक मास ही रह गया है 2017 का जब अविवाहित घोडी़ या डोली चढ़ने के अपने अरमान पूरे कर सकते हैं। पहले तो 10 अक्तूबर से 10 नवंबर तक गुरु अस्त रहा और अब 15 दिसंबर से 2 फरवरी 2018 तक शुक्र देव अस्त रहेंगे जिसे आंचलिक भाषा में तारा डूबना कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में गुरु एवं शुक्र का आकाश में प्रबल स्थिति में होना ऐसे मांगलिक कार्यों में आवश्यक माना गया है।
    इसके अलावा आधुनिक युग की आपाधापी में कई लोगों को विवाह के शुभ मुहूर्त तक प्रतीक्षा करने की फुर्सत ही नहीं है विशेषतः अनिवासी भारतीय जो रहते तो विदेशों में हैं और शादियां भारत में ही करना चाहते हैं वह भी परंपराओं के अनुसार तो उनके लिए रविवार के दिन अभिजित् मुहूर्त होता है जो स्थानीय समय के ठीक 12 बजे से  24 मिनट पहले आरंभ होता है और 24 मिनट बाद तक रहता है अर्थात आप लगभग पौने बारह से सवा बारह बजे के मध्य अभिजीत मुहूर्त में विवाह कर सकते हैं।     

    अभिजित्  का अर्थ है जिसे कोई जीत नहीं सकता अर्थात सर्वश्रेष्ठ समय । इस अवधि में संपन्न किया गया कोई भी मांगलिक कार्य विजय प्राप्त करता है अर्थात शुभ रहता है। भगवान राम एवं भगवान कृष्ण का जन्म इसी मुहूर्त में हुआ है और यह दिन तथा रात्रि में इसी समय रहता है।    
   एक समुदाय में विवाह कार्य अर्थात कारज रविवार को ही ठीक 12 बजे दिन में रखे जाते हैं ।     इस दिन को अवकाश के कारण नहीं चुना गया है अपितु रविवार सब दिनों में सूर्य की शक्ति के कारण सर्वसिद्ध माना गया है। रविवार का अवकाश तो अंग्रेजों ने मात्र 100 साल पूर्व ही आरंभ किया था परंतु भारत में ऐसे समुदायों में 300 सालों से इतवार को ही ठीक मध्यान्ह के समय विवाह किया जाता रहा है। इसके पीछे अभिजित् मुहूर्त ही है जिसे कई कारणों से स्वीकार नहीं किया जाता वरन् केवल रविवार को ही ठीक 12 बजे लावां फेरे न लिए जाते, या तो सुबह 8 बजे हो जाते या सायं 7 बजे भी तो हो सकते हैं। मूल में ज्योतिषीय गणना एवं मुहूर्त ही इसका आधार रहा है।
शुभ विवाह मुहूर्त-
नवंबर-11,12,13,14,23,24,25,28,29,30
दिसंबर- 1,3,4,10,11,12

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