क्या कहता है भारत का भविष्य विक्रमी संवत 2072 में ?

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Madan Gupta Spatu
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मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषविद्, चंडीगढ़ : जैसे किसी व्यक्ति का भविष्य उसकी जन्म तिथि से आंका जाता है, ठीक उसी प्रकार किसी भी देश का भविष्य उसकी स्वतंत्रता प्राप्ति की तिथि और उसके संविधान लागू होने के समय के दृष्टिगत ही देखा जाता है। भारत का भविष्यफल भी ज्योतिषीय आधार पर 15 अगस्त 1947 , रात्रि 23 बजकर 59 मिनट और गणतंत्र दिवस 26 जनवरी,1950, 10.19 बजे ,नई दिल्ली के अनुसार ही देखा जाता है। इसके अलावा अंगे्रजी के नए साल अर्थात पहली जनवरी और विक्रमी संवत के आरंभ पर भी देश का भविष्य आंका जाता है ।
क्या कहता है कीलक नामक संवत 2072?
21 मार्च , 8 चैत्र, शनिवार को कीलक नामक नया विक्रमी संवत 2072 आरंभ हो रहा है जिसमें राजा शनि और मंत्री मंगल होंगे। जब भी संवत में राजा शनि होता है तो बेमौसम बरसात व बाढ़ अवश्य होती है और मौसम का मिजाज अप्रत्याशित तथा अकल्पनीय होता है जैसा कि इसका प्रभाव पहली मार्च से ही दिखना आरंभ हो गया था और मार्च में वर्षा तथा बर्फबारी के कई साल पुराने रिकार्ड टूट गए। शनि के कारण नए रोग व अजीबो गरीब बीमारियां उत्पन्न होने की आशंका रहती है। इस साल स्वाईन फलू का दबदबा रहेगा। शनि ग्रह ,नेताओं में आपसी मतभेद, वैमनस्य, तनावपूर्ण संबंध, विक्षुब्ध वातावरण, विरोध , टकराव, अपमानित करने जैसे कृत्य करवाता है। दिल्ली और कश्मीर की सरकारों का जीवंत उदाहरण सामने है। इस्लामी बाहुल्य देशों में युद्घमय वातावरण के कारण तथा भारत के किसी भाग में भी जनता का पलायन हो सकता है।
स्ंावत का मंत्री मंगल हो तो आतंकवाद, चोरी, आगजनी, लूट, अग्निकांड, विस्फोट, वायु दुर्घनाएं, रेल हादसे, हिंसक उपद्रव आदि की बहुतायत रहती हैं। इस बार राजा व मंत्री परस्पर एक दूसरे के शत्रु हैै, इस कारण धर्मिक उन्माद, हिंंसक उपद्रव, संसद में कोहराम , किसी प्रिय नेता या प्रसिद्घ हस्ती से विछोह, भूकंप, बाढ़, मुस्लिम देशों के आतंक से ,शांति प्रिय देशों में अशांति होना, पेट्रेल, डीजल, सोने, गेहूं तथा अन्य पीले रंग की वस्तुओं की कीमतों में अचानक वृद्घि से मंहगाई बढऩे के आसार बने रहेंगे। पड़ोसी देश, कश्मीर, मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में विद्रोह, उपद्रव, युद्घ जैसी स्थिति मंत्री मंगल के कारण बन सकती है।
इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र का वास समुद्र में होने के कारण, बाढ़ , ज्वारभाटा, सुनामी , अतिवृष्टि जैसी हालत रहेगी। नव वर्ष का भविष्य इस तथ्य पर भी निर्भर करता है कि सूर्य आद्र्रा नक्षत्र में कब प्रवेश करेगा। इससे वर्षा एवं वायुमंडल की भविष्यवाणी की जाती है। इस वर्ष यह योग 22 जून को 16 बजकर 46 मिनट पर बनेगा जिसके फलस्वरुप मौसम अकल्पनीय तथा कहीं वर्षा कहीं सूखे जैसी हालत बनेगी। दक्षिणी तटीय राज्यों को जुलाई के बाद सतर्क रहना चाहिए ताकि समुद्री तूफानों से जान माल की हानि न हो। कृषि उत्पादन अच्छा होगा।
14 जुलाई को गुरु सिंह राशि में आ जाने से कृषि उत्पाद बढ़ेगा ,विदेशी निवेश में भी वृद्घि होगी। इस बार बुधवार को दीवाली होने से व्यापार वृद्घि , सुख समृद्घि, औद्योगिक उत्पादन, शेयर मार्किट , परमाणु ऊर्जा, शिक्षा आदि के क्षेत्रों में आशातीत सफलता मिलेगी।
ग्रहण
इस साल , कुल 4 ग्रहण लगेंगे। 20 मार्च को सूर्य ग्रहण जो भारत में नहीं दिखेगा। चार अप्रैल को चंद्र ग्रहण दृश्य होगा। तेरह सितंबर का सूर्य ग्रहण भी भारत में नहीं दिखेगा और अंतत: 28 सितंबर का चंद्र ग्रहण आप देख सकेंगे। ग्रहण के आस पास भूकंप की आशंका रहेगी।
नव संवत पर अन्य ज्योतिषीय योग
ऽ शनिवार 14 मार्च, कृष्ण पक्ष की अष्टमी से शनि देव, बृश्चिक राशि में वक्री रहेंगे अर्थात नए साल पर शनि की वक्र दृष्टि ही रहेगी।
ऽ नए साल पर गुरु भी वक्री होंगे।
ऽ एक दिन पहले ,20 मार्च को सूर्य ग्रहण लग रहा है।
ऽ नव संवत पर ही पंचक होगा। प्रथम चंद्रोदय मेष राशि में होगा।
ऽ नए साल की शुरुआत ही शनिवार को है।
ऽ नवरात्रे 8 दिन के होंगे
क्या कहता है 8 का अंक और इसका ग्रह शनि?
सर्वप्रथम हम अंकों के आधार पर देश का भविष्य फल आंकेंगे। यदि हम 15-8- 1947 के अंकों का योग करें तो 8 आता है। और इस साल के गणतंत्र दिवस की तिथि 26-1-2015 को जोड़ा जाए तो भी अंक 8 ही आता है। साल 2015 का योग भी 8 ही है। इसके अलावा यदि वर्तमान प्रधान मंत्री की जन्म तिथि देखें तो 17 सितंबर का मूलांक भी 8 ही आता है। उनकी अपनी कुंडली में लग्न का अंक भी 8 ही है।अंक शास्त्र में अंक 8 शनि ग्रह का परिचायक है। आजकल शनि 8 नंबर की राशि बृश्चिक में ही गोचरवश विद्यमान हैं। नए साल में महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 21 मार्च को आरंभ होने वाले कीलक नामक संवत 2072 का राजा और मंत्री दोनों ही शनि हैं। इसके अलावा नए संवत का पहला दिन भी शनिवार ही होगा। शनि ग्रह 2015 में भारत के लिए एक निर्णायक तथा मुख्य ग्रह होंगे जो देश के भविष्य में मुख्य भूमिका निभाएंगे। इसका प्रथम उदाहरण इसी बात से मिल जाता है कि एक शक्तिशाली देश के राष्ट्र्पति भारत के गणतंत्र दिवस पर पहली बार मुख्य अतिथि रहे जो राष्ट्र् के लिए एक गर्व की बात है। शनि के कारण भारत के लिए 2015 का वर्ष सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं प्रगतिदायक होगा।
शनि का संबंध देश के नेतृत्व, राजनीति, सत्ता परिवर्तन, लोहा, केमीकल, चिकित्सा, दवाई, विवाद, बीमारी, मजदूर, रियल एस्टेट, कोयला,, जमीन , जायदाद, कृषि, आकाश , स्पेस आदि से होता है। नए संयोग में शनि अष्टम भाव में होने के कारण धरातल तथा आकाश दोनों से ही संबंधित होंगे । तेल, खनिज, अंडर पास, अंडर ब्रिज, मेट्रे रेल, स्पेस, हवाई मार्ग आदि में विशेष प्रगति भारत के संदर्भ में होगी। यहां ऋणात्मक फल यही रहेगा कि शनि ,मंगल की राशि में आकर आतंकवाद की घटनाओं में वृद्घि करता है । जहां यह न्याय का देवता होकर 2015 में नए नए अद्वितीय एवं असामान्य निर्णय न्यायालयों से करवाएगा वहां दुष्ट प्रकृति के लोगों को सजा भी देगा।
क्या कहती है गणतंत्र दिवस की कुंडली ?
66 वें गणतंत्र दिवस, 26-1-2015 की कुंडली में भी लग्न का अंक 8 ही है। बृश्चिक लग्न में शनि, शत्रुगत राशि में मंगल के साथ ही 4- 10 का संबंध बना रहा है। इसके प्रभाव से देश का सामाजिक एवं राजनीतिक वातावरण अनिश्चित बना रहेगा। सत्ता और विपक्ष आरोप- प्रत्यारोप के चक्कर से बाहर नहीं आ पाएंगे। विदेशी निवेश के आयाम बढ़ेंगे। नदियों की सफाई और उन्हें जोडऩे, सिंचाई संबंधी योजनाएं चलेंगी। गुरु के कारण धार्मिक उन्माद, तीर्थ स्थलों का नवीनीकरण, सौंदर्य करण , रेल से जुड़ाव मुख्य मुदद रहेगा । सीमा पर तनाव, घुसपैठ, दल बदल, राजनीतिक पार्टियों के नवीन समीकरण ,प्राकृतिक प्रकोप, हवाई दुर्घटना या हाईजैकिंग जैेसे विषय देश के सामने पूरा वर्ष छाए रहेंगे। शनि-मंगल की युति एक लोकप्रिय नेता से बिछुडऩा भी इंगित कर रही है।
क्या कहती है स्वतंत्रता दिवस की कुंडली ?
इसी प्रकार 15 अगस्त 2015 को 69 वें वर्ष ,कन्या लग्न की कुंडली में मुन्था पंचम भाव में बनती है। प्रशासनिक भाव पर सूर्य- मंगल-शुक्र- शनि की दृष्टियां होने से प्रधान मंत्री कई जगह विवश दिखेंगे। भ्रष्टाचार के भी कई मामले सामने आएंगे। कई महत्वपूर्ण योजनाएं विपक्ष के कारण लागू नहीं हो पाएंगी। जम्मू – कश्मीर पर पकड़ ढीली रहेगी। धारा 370 का मसला जहां का तहां ही रह जाएगा। धर्म संबंधी विवादित बयानों से सत्ता पक्ष परेशान रहेगा । आतंकवाद , जातीय हिंसा, आंतरिक विरोध भी परेशान रखेगा। परंतु सकारात्मक बात यह रहेगी कि देश आर्थिक रुप से आगे बढ़ेगा। अर्थव्यस्था मजबूत होगी। वित्तीय व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन आएंगे जिससे एक आम आदमी लाभान्वित होगा।
हर परिप्रेक्ष्य से देखा जाए तो भारत का प्रभाव अंतर्राष्ट्र्ीय स्तर पर बढ़ेगा, साख बढ़ेगी, विश्वाकाश पर छाएगा, विश्व गुरुत्व की ओर अग्रसर होगा।
नव संवत पर आप क्या करें उपाय ?
यदि नए साल ,पहली जनवरी या नए विक्रमी संवत , इस साल पर बैंक में नया खाता खेाला जाए या पुराने खाते में धन जमा कराया जाए तो धन में निरंतर वृद्घि होती है।इस दिन किया गया कोई भी नया निवेश कई गुणा बढ़ जाता है। आप नई बीमा पालिसी, म्युचुअल फंड , सोने आदि में पहले दिन धन लगा सकते हैं। इसके अलावा बैंक या घर के लॉकर में , लाल या पीले कपड़े में 12 साबुत बादाम या गिरियां बांध कर रख दिए जाएं तो भी आभूषणों में वृद्घि होती रहती है और उसमें कभी कमी नहीं आती।यह काफी समय से प्रमाणित प्रयोग हैं जो भारतीय परंपरा , आस्था एवं ज्योतिष का एक भाग हैं। इस दिन लोन एकाउंट में पैसा लौटाएं और किसी को उधार न दें न किसी से लें। फिर देखिए आपके यहां बरकत कैसे नहीं होती !
नवरात्रे तथा घट स्थापन ?
21 मार्च से ही चैत्र नवरात्रे आरंभ हैं जो 28 ताराख तक रहेंगे। तृतीया तिथि का क्षय होने से नवरात्रे 8 दिन के है।
घट स्थापना का मुहूर्त – प्रात: 8.15 से 9.45
दोपहर- 12.30 से एक बजे तक
मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषविद्, चंडीगढ़

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