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Thursday, September 21, 2017

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Chanakya

पढ़िये जीवन और मृत्यु से सम्बन्धित गूढ़ कथन को आचार्य चाणक्य...

दशमोऽध्याय आचार्य चाणक्य कहते हैं          एकवृक्षसमारूढा नाना वर्णा विहङ्गमाः। प्रभाते दिक्षु दशसु का तत्र परिवेदना॥१५॥ *शब्दार्थ*   :—  *नानावर्णाः*= विविध रंग और रूपों के *विहङ्गमाः*= पक्षी *एकवृक्ष-समारूढाः*= एक वृक्ष...